उन दिनों, जबके तुम थे यहाँ
ज़िन्दगी जागी जागी सी थी
सारे मौसम बड़े मेहेरबां दोस्त थे
रास्ते दावतनामे थे जो मंजिलों ने लिखें थे ज़मीन पर हमारे लिए
पेड़ बाहें पसारे खड़े थे
हमें छाव की शॉल पहनाने के वास्ते
शाम को सब सितारे, बहुत मुस्कुराते थे जब देखते थे हमें
आती जाती हवाएं, कोई गीत खुशबु का गाती हुयी, छेडती थी, गुज़र जाती थी
आसमां पिघले नीलम का एक गहरा तालाब था
जिसमें हर रात एक चाँद का फूल खिलता था
और पिघले नीलम की लहरों में बहता हुआ
वो हमारे दिलों के किनारों को छू लेता था
उन दिनों, जबके तुम थे यहाँ
अश्कों में धुल गए, सब मुस्कुराते रंग
रास्ते में थक के सो गयी मासूम सी उमंग
दिल है की फिर भी ख्वाब सजाने का शौक है
पत्थर पे भी गुलाब उगाने का शौक है
बरसों से यूँ तो एक अमावस की रात है
अब इसको हौसला कहूँ ये तो जिद्द की बात है
दिल कहता है अँधेरे में भी रौशनी तो है
माना के राख हो गए उम्मीद के ये लौ
इस राख में भी आग कहीं पर दबी तो है
आपकी याद कैसे आएगी
आप ये क्यूँ समझ न पाते हैं
याद तो सिर्फ उनकी आती है
हम कभी जिनको भूल जाते हैं