Monday, August 8, 2011

उन दिनों

उन दिनों, जबके तुम थे यहाँ
ज़िन्दगी जागी जागी सी थी
सारे मौसम बड़े मेहेरबां दोस्त थे
रास्ते दावतनामे थे जो मंजिलों ने लिखें थे ज़मीन पर हमारे लिए 
पेड़ बाहें पसारे खड़े थे
हमें छाव की शॉल पहनाने के वास्ते 
शाम को सब सितारे, बहुत मुस्कुराते थे जब देखते थे हमें
आती जाती हवाएं, कोई गीत खुशबु का गाती हुयी, छेडती थी, गुज़र जाती थी
आसमां पिघले नीलम का एक गहरा तालाब था
जिसमें हर रात एक चाँद का फूल खिलता था
और पिघले नीलम की लहरों में बहता हुआ
वो हमारे दिलों के किनारों को छू लेता था
उन दिनों, जबके तुम थे यहाँ

अश्कों में धुल गए, सब मुस्कुराते रंग
रास्ते में थक के सो गयी मासूम सी उमंग
दिल है की फिर भी ख्वाब सजाने का शौक है
पत्थर पे भी गुलाब उगाने का शौक है
बरसों से यूँ तो एक अमावस की रात है
अब इसको हौसला कहूँ ये तो जिद्द की बात है
दिल कहता है अँधेरे में भी रौशनी तो है
माना के राख हो गए उम्मीद के ये लौ
इस राख में भी आग कहीं पर दबी तो है

आपकी याद कैसे आएगी
आप ये क्यूँ समझ न पाते हैं
याद तो सिर्फ उनकी आती है
हम कभी जिनको भूल जाते हैं

Wednesday, August 3, 2011

ज़िदगी ना मिलेगी दोबारा

इक बात होठों तक है जो आई नहीं
बस आँखों से है झांकती
तुमसे कभी, मुझसे कभी
कुछ लफ्ज़ है वो मांगती
जिनको पेहेन के होटों तक आ जाये वो...
आवाज़ की बाहों में बाहें डालके इठलाये वो

लेकिन जो ये इक बात है
एहसास ही एहसास है
खुशबू सी है जैसे हवा में तैरती
खुशबू जो बेआवाज़ है
जिसका पता तुमको भी है
जिसकी खबर मुझको भी है
दुनिया से भी छुपता नहीं
यह जाने कैसा राज़ है
 --
जब जब दर्द का बादल छाया
जब गम का साया लहराया
जब आंसू पलकों तक आया
जब यह तनहा दिल घबराया
हम ने दिल को ये समझाया...

दिल आखिर तू क्यूँ रोता है
दुनिया में यूँही होता है
यह जो गहरे सन्नाटे हैं
वक़्त ने सबको ही बांटे हैं
थोडा गम है सबका किस्सा
थोड़ी धुप है सबका हिस्सा
आँख तेरी बेकार ही नम है
हर पल एक नया मौसम है
क्यूँ तू ऐसे पल खोता है
दिल आखिर तू क्यूँ रोता है
--
पिघले नीलम सा बहता हुआ ये समा
नीली नीली से खामोशियाँ
न कहीं है ज़मीन
न कहीं आसमा
सरसराती हुई टहनिया, पत्तियां
कह रही हैं की बस एक तुम हो यहाँ
सिर्फ मैं हूँ मेरी सांसें हैं और मेरी धडकनें 
ऐसी गहराइयाँ
ऐसी तनहाइयाँ
और मैं सिर्फ मैं
अपने होने पे मुझको यकीन आ गया
--
दिलों में तुम अपनी
बेताबियाँ लेके चल रहे हो
तो जिंदा हो तुम
नज़र में ख्वाबो की
बिजलियाँ लेके चल रहे हो
तो जिंदा हो तुम
हवा के झोंको के जैसे
आज़ाद रहना सीखो 
तुम एक दरिया के जैसे
लहरों में बहना सीखो
हर एक लमहे से तुम मिलो
खोले अपनी बाहें
हर एक पल एक नया समां
देखें यह निगाहें
जो अपनी आँखों में
हैरानियाँ लेके चल रहे हो
तोह जिंदा हो तुम
दिलों में तुम अपनी
बेताबियाँ लेके चल रहे हो
तोह जिंदा हो तुम